Dil Ki Baatein

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Dil Ki Baatein 

*ज़िन्दगी से लम्हे चुरा*
*बटुए मे रखता रहा!*

*फुरसत से खरचूंगा*
*बस यही सोचता रहा।*

*उधड़ती रही जेब*
*करता रहा तुरपाई*

*फिसलती रही खुशियाँ*
*करता रहा भरपाई।*

*इक दिन फुरसत पायी*
*सोचा …….*
*खुद को आज रिझाऊं*
*बरसों से जो जोड़े*
*वो लम्हे खर्च आऊं।*

*खोला बटुआ..लम्हे न थे*
*जाने कहाँ रीत गए!*

*मैंने तो खर्चे नही*
*जाने कैसे बीत गए !!*

 *फुरसत मिली थी सोचा*
 *खुद से ही मिल आऊं।*

*आईने में देखा जो*
*पहचान  ही न पाऊँ।*

*ध्यान से देखा बालों पे*
*चांदी सा चढ़ा था,*

*था तो मुझ जैसा*
*जाने कौन खड़ा था।*

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इज़ाजत के बगैर…..

ज़र्रे ज़र्रे में उसी का नूर है
झाँक वो न तुझसे दूर है
इश्क़ है अगर उससे तो सबसे इश्क़ कर
इस चाहत का यही दस्तूर है

होती नहीं है मोहब्बत सूरत से,
मोहब्बत तो दिल से होती है,
सूरत उनकी खुद-ब-खुद लगती है प्यारी,
कदर जिनकी दिल में होती है..!!

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